Friday, April 22, 2011

एक अनजाना सा दर्द दिया

एक अनजाना सा दर्द दिया

बेवजह ही इतना गम दिया 



क्या खता हुई हमसे 
जो मुझे मुझसे ही दूर कर दिया 



सिर्फ मुहब्बत ही तो की थी दिल से 

एक पल में ही तन्हा साथ छोड़ दिया



अब तुम ही बताओ क्या करे ये दिल 


जिसे 


एक अनजाना सा दर्द  दिया 

बेवजह ही इतना गम दिया.

झूठे अरमान दिल में जगा कर जिया करते हैं...


बेवफाई के फ़साने भी क्या खूब सितम किया करते हैं,

हँसती हुई आखो तले आसुओं के सैलाब उमड़ जाया करते हैं...

काश वो बेवफा समझ पाते मेरी मुहब्बत की वफाओ को,
बस यही झूठे अरमान दिल में जगा कर जिया करते हैं...

कहाँ पता था हमें!!


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चाहतो में असर कितना हैं !
कहाँ पता था हमें!!

अफसानो का दौर कितना हैं !
कहाँ पता था हमें!!

अक्सर तक्कलुफ़ होता हैं उन भूली बिसरी यादो से!
जिनसे सामना होगा !
कहाँ पता था हमें!!

उनकी यादो में भी एक अजीब दर्द होता हैं!
कहाँ पता था हमें!!

अश्को से छलक पड़ेंगे उस टूटे हुए दिल के दर्द का अहसास!
कहाँ पता था हमें!!

नहीं चाहते थे यादो को उनकी!
पर वो फिर भी दस्तक दे देंगे!
कहाँ पता था हमें!!

काश ना पड़ते इस हसीन धोके में!
कहाँ पता था हमें!!